अमलीपदर में राखी से लिया साइबर सुरक्षा का संकल्प

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✍️ लोकहित 24 न्यूज़ संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद _ फर्जी पुलिस, फर्जी साइबर थाना और APK लिंक से सावधान रहने की अपील थाना प्रभारी ने ग्रामीणों को बताए साइबर ठगी से बचाव के तरीके साइबर ठगी के लिए ठगों को अब न किसी घर का दरवाजा तोड़ना पड़ता है और न ही कोई ताला खोलना पड़ता है एक गलत लिंक, एक साझा किया गया OTP या डर में उठाया गया गलत कदम सीधे बैंक खाते तक पहुंच का रास्ता खोल सकता है इसी बढ़ते साइबर खतरे के बीच अमलीपदर थाना क्षेत्र में पुलिस द्वारा साइबर जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों को साइबर अपराध से बचाव के प्रति जागरूक किया गया अभियान के दौरान अमलीपदर थाना प्रभारी विजय कुमार ध्रुव ने लोगों को साइबर ठगी के बदलते तरीकों की जानकारी देते हुए कहा कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार तकनीक से ज्यादा लापरवाही, डर और लालच है। उन्होंने लोगों से अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने और किसी भी संदिग्ध डिजिटल गतिविधि में सावधानी बरतने की अपील की।

APK लिंक बना ठगी का नया रास्ता

पुलिस ने विशेष रूप से APK फाइल वाले लिंक से सावधान रहने की सलाह दी बताया गया कि अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए किसी लिंक को बिना जांचे डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। खासकर लिंक के अंत में “.APK” दिखाई देने पर अतिरिक्त सावधानी बरतने और ऐसी फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल करने से बचने की हिदायत दी गई।

OTP बताया तो खुल सकता है डिजिटल दरवाजा

जागरूकता अभियान में पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि OTP किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना है बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, साइबर अधिकारी या कोई अन्य सरकारी कर्मचारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति यदि OTP अथवा बैंक संबंधी संवेदनशील जानकारी मांगे तो तत्काल सतर्क हो जाएं।

मोबाइल स्क्रीन पर ‘फर्जी थाना’, वीडियो कॉल पर डर का खेल

साइबर अपराधियों के एक नए हथकंडे के रूप में फर्जी पुलिस और फर्जी साइबर थाना के नाम पर की जाने वाली ठगी से भी लोगों को सावधान किया गया वीडियो कॉल पर कई लोग पुलिस की वर्दी में दिखाई देते हैं कोई खुद को हवलदार, कोई इंस्पेक्टर और कोई साइबर क्राइम का अधिकारी बताकर सामने वाले को डराने की कोशिश करता है।

इसके बाद गिरफ्तारी, अवैध गतिविधि और यहां तक कि ‘हाउस अरेस्ट’ करने की धमकी देकर लोगों से पैसे या संवेदनशील जानकारी मांगी जाती है पुलिस ने समझाया कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय शांत रहें और किसी भी अनजान व्यक्ति को बैंक, OTP अथवा व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।

ठगी हो जाए तो इंतजार नहीं, तुरंत 1930 पर शिकायत

पुलिस ने साइबर ठगी के पीड़ितों से समय बर्बाद नहीं करने की अपील की ठगी का पता चलते ही तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई पुलिस ने बताया कि शुरुआती समय में शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने या आगे की कार्रवाई में मदद मिल सकती है।

राखी के धागे में बंधा साइबर सुरक्षा का संकल्प

अमलीपदर के साइबर जागरूकता अभियान का सबसे अनूठा और संदेशपरक पहलू रहा ‘जागरूकता की राखी’ कार्यक्रम के अंतिम चरण में महिला जनप्रतिनिधियों ने मौजूद जनप्रतिनिधियों और भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें साइबर ठगी से बचने का संकल्प दिलाया इसके साथ ही महिला जनप्रतिनिधियों ने मौजूद पुलिसकर्मियों की कलाई पर भी राखी बांधी।

यह राखी महज भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीक नहीं रही, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और जागरूकता की सौगंध बन गई।

इस दौरान लोगों ने संकल्प लिया—

न APK लिंक पर जाएंगे,

न OTP बताएंगे,

न साइबर ठगों से डरेंगे,

न लालच में आएंगे,

और न ही किसी साइबर ठगी का हिस्सा बनेंगे।

पुलिस के साथ जनप्रतिनिधि और ग्रामीण भी हुए शामिल

कार्यक्रम में अमलीपदर थाना क्षेत्र के सरपंच, बीडीसी सदस्य, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और क्षेत्रीय पत्रकार मौजूद रहे इस अवसर पर निर्भय सिंह ठाकुर, हेमो बाई नागेश, हलमन ध्रुवा, हेमलाल ध्रुव, पुरुषोत्तम सोम, जयराम नागेश, ध्रुव सिंह ओटी, पिंकी साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच अमलीपदर पुलिस का यह अभियान लोगों को यह संदेश देने वाला रहा कि साइबर ठगी से बचने का सबसे बड़ा हथियार कोई महंगा सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि सतर्कता और जागरूकता है आज जब ठग मोबाइल की स्क्रीन को ही अपना ‘थाना’ और वीडियो कॉल को अपनी ‘अदालत’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे समय में जागरूकता की एक छोटी-सी राखी भी बड़े साइबर खतरे के खिलाफ सुरक्षा का संकल्प बन सकती है।

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