मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मन की बात का श्रवण इंदौर के शिप्रा में किया” पीएम श्री मोदी ने देश के नागरिकों से बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाईयां न लेने का आव्हान किया

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मन की बात का श्रवण इंदौर के शिप्रा में किया” पीएम श्री मोदी ने देश के नागरिकों से बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाईयां न लेने का आव्हान किया

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“मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की मन की बात का श्रवण इंदौर के शिप्रा में किया”

पीएम श्री मोदी ने देश के नागरिकों से बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीबायोटिक दवाईयां न लेने का आव्हान किया

इंदौर–:– प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रसिद्ध कार्यक्रम मन की बात के 129 वे संस्करण को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को इंदौर जिले के शिप्रा में श्रवण किया।

उन्होंने शासकीय स्वास्थ्य केन्द्र शिप्रा में आयोजित कार्यक्रम में विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, वरिष्ठ विधायक श्री हेमंत खंडेलवाल, सांसद श्री शंकर लालवानी, श्री हितानंद शर्मा, श्री रायसिंह सेंधव, श्री श्रवण चावड़ा, श्री सुमित मिश्र, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सिद्धार्थ जैन विशेष रूप से उपस्थित थे।


मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि 2025 में अंतरिक्ष यात्री श्री सुभांशु शुक्ला की सफल वापसी, भारत द्वारा सिन्दूर ऑपरेशन, पुरूष और महिला क्रिकेट टीम द्वारा खिताबी जीत तथा दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम का चैम्पियन बनना प्रमुख घटनाएं रही। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगे कहा कि अगले वर्ष 26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनायेंगा। हम अपनी विरासत को नहीं भूले। उन्होंने आगे कहा कि देश के नागरिक बिना चिकित्सकीय सलाह के एन्टिबॉयोटिक दवाईयों का सेवन नहीं करें।
*मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के संबंध भौगोलिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परम्परा की यह सांझी विरासत है*
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मन की बात के कार्यक्रम के पश्चात इसी स्थल से वीडियो कान्फ्रें स के द्वारा जबलपुर में मराठी स्कूल स्थापना के 100 वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र का केवल भौगोलिक संबंध ही नही है, बल्कि सांस्कृतिक परंपरा की यह सांझी विरासत है। महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी महाराज के काल में मुगलों के खिलाफ शुरू हुई लड़ाई में मध्यप्रदेश में बाजीराव पेशवा, शिंदे, गायकवाड से होलकर शासन तक मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के संबंध रहे और यह आज भी बने हुए है। 20वीं शताब्दी में वर्ष 1926 में महाराष्ट्र के समाजसेवियों ने नई पीढ़ियों को तैयार करने के ‍लिए शैक्षणिक संस्था महाराष्ट्र शिक्षण मंडल संस्था की शुरुआत की थी। आज यह संस्था अपना शताब्दी वर्ष मनाने जा रही है। इस शैक्षणिक संस्था के खाते में कई सामाजिक और बौद्धिक उपलब्धियां दर्ज है। महाराष्ट्र शिक्षण मंडल संस्था पूर्ण दक्षता के साथ नवाचार को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मैं महाकाल की नगरी में बैठकर विठ्ठल का आशीर्वाद प्राप्त कर रहा हूँ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री सुन्दरलाल पटवा और कुशाभाऊ ठाकरे की तस्वीरों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश भी शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार कर विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ उनके चरित्र को गढ़ रहा है। मध्यप्रदेश के अधिकांश जिलों में सांदीपनी विद्यालय शुरू किए गए। साथ ही पीएम राईज विद्यालय भी संचालित किए जा रहे है जिसके अच्छे परिणाम प्राप्त हो रहे है। प्रदेश में 50 से अधिक आज विश्वविद्यालय है। गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले इसके लिए खरगोन में टंट्या भील विश्वविद्यालय सहित ग्वालियर में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और रानी अवंतिबाई विश्वविद्यालय शुरू किए गए हैं।

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