स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस एवं मकर संक्रांति के उपलक्ष में सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन सूर्य नमस्कार से संपूर्ण स्वास्थ्य संवर्धन – योगाचार्य मिथलेश सिन्हा

स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस एवं मकर संक्रांति के उपलक्ष में सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन सूर्य नमस्कार से संपूर्ण स्वास्थ्य संवर्धन – योगाचार्य मिथलेश सिन्हा

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स्वामी विवेकानंद जयंती युवा दिवस एवं मकर संक्रांति के उपलक्ष में सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन सूर्य नमस्कार से संपूर्ण स्वास्थ्य संवर्धन – योगाचार्य मिथलेश सिन्हा

छुरा–:–स्वामी विवेकानंद जी के जयंती युवा दिवस एवं मकर संक्रांति के पावन पर्व के उपलक्ष पर पतंजलि युवा भारत के तत्वाधान में भव्य सूर्य नमस्कार का आयोजन नगर के मिनी स्टेडियम में किया गया ।जिसमें योगाचार्य मिथलेश सिन्हा के द्वारा समस्त लोगों को सूर्य नमस्कार कराया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती लुकेश्वरी निषाद अध्यक्ष नगर पंचायत,अध्यक्षता भोले शंकर जायसवाल सभापति ,गरिमा ध्रुव सभापति नगर पंचायत ,विशेष अतिथि के तौर पर पवन सिंह हेल्थ वेलनेस कोच ,नगर सेठ शंकर सचदेव एवं कृष्णा यादव ,समाजसेवी शीतल ध्रुव उपस्थित रहे। अतिथियों ने सर्व प्रथम मां भारती के छाया चित्र पर पूजन अर्चन कर विधिवत रूप से कार्यक्रम का शुभारंभ किया।सूर्य नमस्कार के फायदे को बताते हुए योगाचार्य मिथलेश सिन्हा ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और रोगों के बीच सूर्य नमस्कार एक ऐसा योग अभ्यास है, जिसे विज्ञान भी संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए प्रभावी मानता है। 12 योगासनों से मिलकर बना सूर्य नमस्कार शरीर, मन और मस्तिष्क—तीनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।नियमित सूर्य नमस्कार से तंत्रिका तंत्र सुदृढ़ होता है, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद में कमी आती है। नगर पंचायत अध्यक्ष लुकेश्वरी निषाद ने कहा कि सूर्य नमस्कार भारतीय योग परंपरा में सूर्य नमस्कार का विशेष और प्राचीन स्थान रहा है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक साधना है, जिसे हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को स्वस्थ, संतुलित और ऊर्जावान बनाए रखने के लिए विकसित किया। वेलनेस कोच पवन सिन्हा ने स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, वेदांत और योग दर्शन को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा दिलाई। 1893 के शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में उनके ऐतिहासिक उद्बोधन ने संपूर्ण विश्व को भारत की आध्यात्मिक शक्ति से परिचित कराया। “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो” जैसे उनके प्रेरक वाक्य आज भी युवाओं को कर्मपथ पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।समाज सेवी शीतल ध्रुव ने कहा कि आज के समय में स्वामी विवेकानंद के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। आत्मनिर्भरता, नैतिकता, सामाजिक समरसता और मानव सेवा का जो संदेश उन्होंने दिया, वही एक सशक्त और विकसित भारत की नींव रख सकता है।
स्वामी विवेकानंद जयंती पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाकर एक श्रेष्ठ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें। इस अवसर पर सरस्वती शिशु मंदिर प्राचार्य प्राचार्य संतोष वर्मा थानेश्वरी यादव प्रधापाठिका ज्ञान अमृत विद्यालय, होरीलाल साहू,किरण वर्मा,अलका सिन्हा,कविता यदु, मैनाज बेगम, टेकेश्वरी तारक, कुंती साहू,रेखा सोरी,सेवक निषाद, टोमन ठाकुर,यशोदा साहू,राहुल सिन्हा,मनोज निर्मलकर,हेमलता नाग, डिगेश्वरी यादव एवं सैकड़ों की संख्या में छात्र- छात्राएं मौजूद रहे।

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