आईएसबीएम विश्वविद्यालय के रिसर्च कॉन्क्लेव में शोध कार्य पर विशेष जोर

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आईएसबीएम विश्वविद्यालय के रिसर्च कॉन्क्लेव में शोध कार्य पर विशेष जोर

छुरा–:–आईएसबीएम विश्वविद्यालय, नवापारा (कोसमी) के सेमिनार हॉल में शनिवार को रिसर्च कॉन्क्लेव एवं मेंटर–मेंटी कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य शोधार्थियों एवं शिक्षकों को शोध की गुणवत्ता, दिशा एवं अकादमिक उन्नति के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना रहा। इस क्रम में मेंटर-मेंटी कार्यक्रम के रूप में दिखाया गया।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ बीपी भोल ने कहा कि रिसर्च कानक्लेव का मक़सद शोध के क्षेत्र में नई दृष्टि को विकसित करना है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी शोध करते समय हम कोई बिल्कुल नई वस्तु या तथ्य भले ही न खोज पाएं, लेकिन वस्तुओं, घटनाओं और समस्याओं को देखने का हमारा नया दृष्टिकोण तथा नई मेथडोलॉजी हमें नवीन ज्ञान प्रदान करती है। आज यही दृष्टि इंजीनियरिंग में एक विशेष शाखा के रूप में पढ़ाई जा रही है, जहाँ नवाचार का केंद्र केवल परिणाम नहीं, बल्कि सोचने की प्रक्रिया और समस्या-समाधान का तरीका होता है।

आइक्यूएसी निदेशक एवं शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ एन कुमार स्वामी ने कहा कि शोध करने से आलोचनात्मक विवेक विकसित होता है। शोधार्थी सिर्फ़ शोध करने से नहीं होता बल्कि नई दृष्टि से देखने पर भी या नया जोड़ने पर भी शोधार्थी हो सकते हैं। हर व्यक्ति की अपनी दुनिया होती है और उसी से व्यक्ति अपनी परिकल्पना करता है। हम जो भी डेटा लेते हैं उसे अपने हाइपोथीसिस से मिलाते हैं और अगर वह डेटा कुछ हद तक सही परिणाम देता है तो ही आगे बढ़ना चाहिए। इस क्रम में मेंटर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। इसलिए शोध पत्र लिखने से पहले हमें विषय का अध्ययन अनिवार्य है। दरअसल रिसर्च पेपर एक मूवी की तरह होता है जिसमें शुरुआत में समस्याओं को दिखाया जाता है। इसी तरह शोधपत्र में सबसे पहले शोध समस्याओं को देखना चाहिए।

कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन डॉ पूनम वर्मा ने दिया।कार्यक्रम का संचालन सुश्री देबो पिल्लई ने किया।

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