स्टार्ट-अप कार्यशाला का सफल आयोजन —विद्यार्थियों ने सीखे आधुनिक सेल्स एवं मार्केटिंग के व्यावहारिक गुर

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स्टार्ट-अप कार्यशाला का सफल आयोजन —विद्यार्थियों ने सीखे आधुनिक सेल्स एवं मार्केटिंग के व्यावहारिक गुर

छुरा–:–ISBM University, छुरा में 17 फरवरी 2026 को “स्टार्ट-अप के लिए प्रभावी सेल्स एवं मार्केटिंग रणनीतियाँ” विषय पर आयोजित एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (IIC) द्वारा सेमिनार हॉल में आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं नवोदित उद्यमियों को आधुनिक विपणन तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ गरिमामय वातावरण में अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, कुलसचिव, IIC के अध्यक्ष एवं संयोजक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी एवं प्राध्यापकगण उपस्थित रहे। अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में स्टार्ट-अप की सफलता के लिए प्रभावी सेल्स एवं मार्केटिंग रणनीतियों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार, आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल के साथ उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला में क्षेत्र के प्रतिष्ठित उद्यमियों एवं अतिथि विशेषज्ञों — भोलेशंकर जायसवाल, चंचल सिन्हा, दिनेश सचदेवा, शांतनु सिन्हा, पवन सिन्हा, राजेश यादव, कोमल साहू, हेमचंद यादव तथा प्रीतम कुमार साहू — ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र से जुड़े व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को वास्तविक बाजार की गहन समझ प्रदान की।

भोलेशंकर जायसवाल ने स्थानीय स्तर पर उद्यमिता के अवसरों, छोटे व्यवसायों की चुनौतियों तथा जनसंपर्क और विश्वास निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किसी भी स्टार्ट-अप की सफलता में सामाजिक जुड़ाव और ग्राहक संतुष्टि की अहम भूमिका होती है।

चंचल सिन्हा ने रिटेल व्यापार के अपने अनुभव साझा करते हुए प्रभावी ग्राहक सेवा, उत्पाद प्रस्तुति तथा प्रतिस्पर्धी बाजार में टिके रहने की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने ब्रांड वैल्यू और दीर्घकालीन ग्राहक संबंध बनाने पर विशेष जोर दिया।

दिनेश सचदेवा ने आधुनिक रिटेल प्रबंधन, सप्लाई चेन, स्टॉक मैनेजमेंट और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि तकनीक के समुचित उपयोग से व्यवसाय की कार्यक्षमता और पारदर्शिता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं।

शांतनु सिन्हा ने छोटे व्यापार को बड़े स्तर तक विकसित करने के लिए मार्केटिंग नेटवर्क, ग्राहक व्यवहार और स्थानीय बाजार की समझ पर अपने विचार रखे। उन्होंने युवाओं को जोखिम लेने और नवाचार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

पवन सिन्हा ने फूड इंडस्ट्री में गुणवत्ता नियंत्रण, ब्रांड पहचान और उपभोक्ता विश्वास के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने स्वच्छता, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी प्रचार-प्रसार को व्यवसाय की सफलता का प्रमुख आधार बताया।

राजेश यादव ने विनिर्माण क्षेत्र में स्टार्ट-अप की संभावनाओं, लागत प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग पर प्रकाश डाला। उन्होंने उद्योग स्थापना की प्रक्रियाओं और संबंधित सरकारी योजनाओं की भी उपयोगी जानकारी दी।

कोमल साहू ने परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अवसरों, समय प्रबंधन और सेवा की विश्वसनीयता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि मजबूत नेटवर्किंग और समयबद्ध सेवा किसी भी व्यवसाय की रीढ़ होती है।

हेमचंद यादव ने स्थानीय उद्यमिता के अनुभव साझा करते हुए सीमित संसाधनों में व्यवसाय प्रारंभ करने की रणनीतियों पर चर्चा की और आत्मनिर्भरता की भावना को प्रोत्साहित किया।

प्रीतम कुमार साहू ने कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षित मानव संसाधन किसी भी स्टार्ट-अप की सफलता की कुंजी है। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को कौशल आधारित उद्यमिता की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।

इन सभी विशेषज्ञों के क्षेत्रानुसार व्याख्यानों ने विद्यार्थियों को उद्यमिता के विभिन्न आयामों की गहन और व्यावहारिक समझ प्रदान की। कार्यशाला के दौरान इंटरैक्टिव सत्र, रियल-टाइम केस स्टडी, लाइव पिच प्रैक्टिस तथा नेटवर्किंग गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने समूहों में कार्य करते हुए अपने स्टार्ट-अप आइडियाज प्रस्तुत किए और विशेषज्ञों से सीधे सुझाव प्राप्त किए, जिससे उनका आत्मविश्वास, संप्रेषण कौशल और टीमवर्क की भावना सुदृढ़ हुई।

कार्यक्रम के अंतर्गत लगाए गए विभिन्न स्टॉलों में विद्यार्थियों ने अपने नवाचार, उत्पादों एवं प्रोजेक्ट्स का प्रदर्शन किया। इन स्टॉलों ने प्रतिभागियों को वास्तविक बाजार परिस्थितियों का अनुभव कराया और उन्हें व्यावहारिक विपणन कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान किया। उपस्थित अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस कार्यशाला को युवाओं में उद्यमिता, नवाचार एवं स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। विश्वविद्यालय ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव विद्यार्थियों को भविष्य में सफल उद्यमी बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करेगा और क्षेत्र में स्टार्ट-अप संस्कृति को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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