तेल नदी का उद्गम उड़िसा व छत्तीसगढ़ सीमा अमरावती जंगल के खुले मैदान से निकली 296 किमी लंबी प्रवाहित

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गरियाबंद–:– तेल नदी गरियाबंद जिले के बहुल देवभोग विकास खण्ड में बीचोंबीच स्थित व बहती है। इसमें सुखे मौसम के दौरान भी रेत के नीचे पानी का पर्याप्त बहाव रहता है।यह महानदी का सहायक नदी है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार तेल नदी ओडिशा के नवरंगपुर जिले ओडिशा और छत्तीसगढ़ सीमा के निकट में अमरावती वन क्षेत्र के पास स्थित मैदानी और खुले मैदान से निकलती है। तेल नदी भारत के ओडिशा और छत्तीसगढ़ राज्यों में बहने वाली 296 किलोमीटर लंबी एक सहायक नदी है। इसका अधिकांश भाग ओडिशा में है, और इसका कुछ अंश दोनों राज्यों सीमा निर्धारित करता है। तेल नदी महानदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है।यह तिटिलागढ़ कस्बे से लगभग 8 किलोमीटर दूर बहती है। महानदी की यह महत्वपूर्ण सहायक नदी सोनपुर तथा सबर्ण पुर में मुख्य नदी से मिलती है। तेल नदी छत्तीसगढ़ की पहाड़ियों से निकलती है। और ओडिशा के सालेभाटा के पास देवगांव नामक स्थान पर महानदी पर मिलती है।

उद्गम और बहाव
तेल नदी का उद्गम स्थल ओडिशा के कोरापुट ( नवरंगपुर) के पास जिले में है और यह उत्तर पूर्व की ओर बहती है।यह तेल नदी देवभोग क्षेत्र में लगभग 55 प्रतिशत नदी किनारे बसे गांवों के किसानों को फसल उत्पादन में पानी की सुविधा उपलब्धता सुनिश्चित होती है। तेल नदी के पानी से सुखे मौसम में बहुत मददगार साबित होती है। बीते कुछ सालों में इस क्षेत्र में प्रकृति बारिश नहीं हुई थी, तब तेल नदी किनारे के आमने-सामने गांव जहां पानी की किल्लत से जूझ रहे थे तो उन्होंने तेल नदी की पानी से धान व अन्य फसलें उगाई गई। नदी किनारे बसे गांव के किसान अपने खेतों में रबी सीजन फसल जैसे मूंगफली, मक्का, गन्ना व अन्य हरे पत्ते वाली सब्जियां फल फूल उगाते हैं। देवभोग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में प्रकृति बारिश नहीं गिरने से सुखाग्रस्त पड़ने से किसानों को धन क्षतिग्रस्त हुई थी तब छत्तीसगढ़ सरकार ने इस इलाके में सुखे से राहत के लिए लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर तटबंध निर्माण किया गया है। क्षेत्र के किसान नहर से पानी अपने खेतों तक पहुंचाने में काफी मदद मिलती है।

सहायक नदियां

तेल नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं उदंती, इन्द्र,लाट,सुतकेल,हट्टी,रेट,उत्तेई,राउल और खडागो शामिल है।

भौगोलिक स्थिति

यह नदी ओडिशा की दूसरी सबसे बड़ी नदी प्रणाली का हिस्सा माना जाता है।यह क्षेत्र के कृषि और स्थानीय निवासियों के लिए पानी का महत्त्वपूर्ण स्त्रोत है।

संगम

तेल नदी सुबर्ण पुर ( सोनपुर) के पास महानदी में विलय हो जाती है। लेकिन इसके रेत के नीचे पानी का प्रवाह बना रहता है।

सूखा प्रवण

कई बार तेल नदी में गर्मियों के दौरान कम बहाव देखा जाता है, लेकिन इसके रेत के नीचे भी पानी का प्रवाह बनी रहती है। जिससे लोग अपने-अपने सीमा नदी तट पर क्यारियां बना कर पानी बहाव रोककर नहाना,धोना गर्मी में निपटते हैं और एक दो माह भीतर तेज धूप गर्मी लगने से पानी सुखने की कगार पर आ जाती है, तो उसे कुछ दिनों बाद लोग मच्छली पकड़ते हैं। अभी फिलहाल गर्मी माह शुरू हो गई है तो कुछ लोग गर्मी से निपटने के लिए तेल नदी के रेत में फल फूल साग-सब्जियां उगाते हैं। जिससे लोगों को आमदनी में ज्यादा इजाफा होता है। जिससे लोगों की आर्थिक स्थिति सबल होती है ‌।

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