अनिश्चितकालीन हड़ताल पर तेंदूपत्ता प्रबंधक 38 वर्षों से हो रहा अन्याय अब नहीं सहेंगे बार-बार ज्ञापन, फिर भी नहीं हुआ समाधान अब आर-पार की लड़ाई को तैयार प्रबंधक तेंदूपत्ता व्यवस्था पर संकट – लाखों ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका गरियाबंद में 18 अप्रैल से खरीदी शुरू, 80 हजार परिवार ग्रामीण सीधे होंगे प्रभावित

अनिश्चितकालीन हड़ताल पर तेंदूपत्ता प्रबंधक 38 वर्षों से हो रहा अन्याय अब नहीं सहेंगे बार-बार ज्ञापन, फिर भी नहीं हुआ समाधान अब आर-पार की लड़ाई को तैयार प्रबंधक तेंदूपत्ता व्यवस्था पर संकट – लाखों ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका गरियाबंद में 18 अप्रैल से खरीदी शुरू, 80 हजार परिवार ग्रामीण सीधे होंगे प्रभावित

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गरियाबंद–:–
छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी समिति प्रबंधक संघ के आह्वान पर प्रदेश के 902 लघु वनोपज प्रबंधक 22 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान कर चुके हैं। वर्षों से लंबित मांगों के निराकरण के लिए शासन-प्रशासन को बार-बार ज्ञापन एवं निवेदन दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने से आक्रोशित प्रबंधकों ने अब निर्णायक संघर्ष का रास्ता अपना लिया है।
छत्तीसगढ़ प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने बताया कि प्रबंधक विगत लगभग 38 वर्षों से सुदूर वनांचल क्षेत्रों में वनोपज संग्रहण, समितियों के संचालन एवं विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा, समुचित वेतनमान, पेंशन, मेडिकल एवं अन्य शासकीय सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। संघ का कहना है कि यह स्थिति प्रबंधकों के साथ निरंतर हो रहे शोषण का प्रतीक है।
संघ ने अपनी प्रमुख मांगों में *नियमितीकरण, वेतन मैट्रिक्स लेवल 07, 08 एवं 09 लागू करना, सेवा सुरक्षा, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति एवं लंबित भुगतान का निराकरण शामिल किया है। प्रबंधकों का आरोप है कि पूर्व में कई बार आश्वासन दिए गए, यहां तक कि मांगों पर विचार हेतु कमेटी गठन एवं नियमित बैठक का भी भरोसा दिलाया गया, किन्तु आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया, जिससे प्रबंधकों में भारी रोष व्याप्त है।*
प्रबंधक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी साहू ने कहा कि हड़ताल के चलते प्रदेश में तेंदूपत्ता संग्रहण, 67 प्रकार के लघु वनोपज की समर्थन मूल्य खरीदी, बीमा, छात्रवृत्ति, बोनस वितरण सहित विभिन्न योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ज्ञात हो कि प्रदेश में लाखों ग्रामीण परिवार वनोपज पर निर्भर हैं, जिनकी आजीविका इस व्यवस्था से जुड़ी हुई है।
*खरीदी शुरू, ज्यादा नुकसान की आशंका*
गरियाबंद जिले में भी प्रबंधकों द्वारा 23 अप्रैल 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लेते हुए संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंप दिया गया है। जिले में 18 अप्रैल से तेंदूपत्ता खरीदी प्रारंभ हो चुकी है, ऐसे में हड़ताल का सीधा असर यहां के लगभग 80 हजार ग्रामीण परिवारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। तेंदूपत्ता संग्रहण, भुगतान एवं प्रबंधन कार्य प्रभावित होने से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र होगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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