गरियाबंद में महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ किया वट सावित्री व्रत पति की लंबी उम्र सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखा निर्जला उपवास

गरियाबंद में महिलाओं ने श्रद्धा और भक्ति के साथ किया वट सावित्री व्रत पति की लंबी उम्र सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए रखा निर्जला उपवास

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✍️ लोकहित 24 न्यूज़ संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद _ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को पूरे छत्तीसगढ़ सहित गरियाबंद जिले में वट सावित्री व्रत श्रद्धा, आस्था और भक्ति के साथ मनाया गया सुबह से ही मंदिरों और वट वृक्षों के नीचे सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।गरियाबंद के फारेस्ट कॉलोनी गांधी मैदान और काली मंदिर स्थित वट वृक्ष के नीचे महिलाओं ने पूरे रस्म-रिवाज के साथ पूजा की। पारंपरिक वेशभूषा, हाथों में पूजा की थाली और वट वृक्ष की परिक्रमा करती महिलाओं की आस्था देखते ही बन रही थी कई स्थानों पर सामूहिक रूप से कथा श्रवण और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया महिलाओं ने वट वृक्ष पर कच्चा धागा बांधकर सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना की इस दौरान महिलाओं ने माता सावित्री और सत्यवान की कथा का श्रवण किया धार्मिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धिमत्ता और अटल निष्ठा से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले आए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है पूजा में शामिल वर्षा तिवारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत केवल परंपरा नहीं बल्कि पति-पत्नी के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है उन्होंने कहा कि महिलाएं पूरे वर्ष इस पर्व का इंतजार करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए श्रद्धा से व्रत रखती हैं वहीं सविता देवांगन ने कहा कि वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने वाला पर्व है उन्होंने बताया कि सुबह से महिलाएं निर्जला व्रत रखकर पूजा-अर्चना करती हैं और भगवान से परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं धार्मिक जानकारों के अनुसार वट यानी बरगद का वृक्ष अमरत्व और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है मान्यता है कि इस वृक्ष में त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है यही कारण है कि महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर उसकी परिक्रमा करती हैं अब यह परंपरा केवल विवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं रही। छत्तीसगढ़ सहित कई जगहों पर कुंवारी लड़कियां भी योग्य और अच्छा जीवनसाथी पाने की कामना से वट सावित्री व्रत और पूजा में शामिल हो रही हैं गांव से लेकर शहर तक श्रद्धा और भक्ति से सराबोर यह पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में नजर आया। महिलाओं की आस्था और उत्साह ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया पूजा में शामिल हुई गरियाबंद जिला पंचायत उपाध्यक्ष लालिमा ठाकुर डाली ठाकुर रिंकी सोनी सहित अन्य महिलाए उपस्थित थे।

 

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