पत्थर के महलों के बीच, लोग गाँव ढूँढ रहे हैं| पेड़ काटकर देखो, लोग छाँव ढूँढ रहे हैं||

पत्थर के महलों के बीच, लोग गाँव ढूँढ रहे हैं| पेड़ काटकर देखो, लोग छाँव ढूँढ रहे हैं||

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✍🏻”लोकहित 24 न्यूज़ एक्सप्रेस लाइव” प्रधान संपादक– सैयद बरकत अली की रिपोर्ट गरियाबंद (छत्तीसगढ़)

पत्थर के महलों के बीच,
लोग गाँव ढूँढ रहे हैं|
पेड़ काटकर देखो,
लोग छाँव ढूँढ रहे हैं||

विश्व पर्यावरण दिवस पर त्रिवेणी संगम राजिम की साहित्य संगोष्ठी संपन्न

राजिम/गरियाबंद –:-
विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा की विशेष काव्य गोष्ठी नवनिर्मित साहित्य सदन राजिम वार्ड नम्बर 15 नवाडीह में संपन्न हुआ!कार्यक्रम की अध्यक्षता संतोष साहू”प्रकृति”राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक राजिम ने किया!कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार मकसुदन राम साहू”बरीवाला”ने कहा कि आज हमें न केवल वृक्षारोपण की जरूरत है बल्कि पेड़ पौधों का संरक्षण उससे भी ज्यादा महत्व पूर्ण है!इसी कड़ी में कवि भारत प्रभु ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा कि”एक वृक्ष सौ पुत्र समान,इनका सदा करो सम्मान!”काव्य पाठ की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए माधुर्य कवि रोहित साहू ने कटाक्ष करते हुए कहा कि पत्थर के महलों के बीच लोग गाँव ढूँढ रहे है,पेड़ काटकर देखो छाँव ढूँढ रहे हैं|प्रस्तुत करके माहौल को जबरदस्त ऊँचाई प्रदान किया,तो गजलकार रामेश्वर रंगीला ने अपनी छोटी-छोटी पंक्तियों के माध्यम से हास्य व्यंग की लडी़ पिरोई|संचालन कर रहे शिक्षक एवं साहित्यकार श्रवण कुमार साहू”प्रखर ने धारदार रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि” अर्जुन फिर से बेबस हो गया,गांडीव में टंकार नहीं,कुरुक्षेत्र फिर बिलख रही है,अवध में अलंकार नहीं |अध्यक्षता कर रहे संतोष साहू “प्रकृति”ने”मैं महानदी के धारी हरो, तोर पुरखा के चिन्हारी हरो,पढ़कर महानदी के बिगड़ते स्वरूप पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि समय रहते हम सभी को चेतना होगा अन्यथा परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे|इस अवसर पर सभी साहित्यकारों एवम दर्शकों ने”एक वृक्ष माँ के नाम”लगाने हेतु राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया,आभार प्रदर्शन रामेश्वर रंगीला ने किया|

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