बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी हो बढ़ चढ़कर शामिल – बीईओ श्री डी.एन बघेल,देवभोग

बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी हो बढ़ चढ़कर शामिल – बीईओ श्री डी.एन बघेल,देवभोग

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✍🏻”लोकहित 24न्यूज़ एक्सप्रेस लाइव” जिला ब्यूरो चीफ– चरण सिंह क्षेत्रपाल की रिपोर्ट गरियाबंद (छत्तीसगढ़)

बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी हो बढ़ चढ़कर शामिल – बीईओ श्री डी.एन बघेल,देवभोग

 

गरियाबंद –:- छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश पर गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लाक अंतर्गत सभी संकुल केंद्रों में संकुल स्तरीय पालक शिक्षक मेगा का बैठक का आयोजन रखी गई थी, जिसमें कुल 21 संकुल केंद्रों में पालक शिक्षक मेगा बैठक का आयोजन किया गया। उक्त बैठक रखी जाने की मुख्य विशेषत:यह है कि विद्यार्थियों की संपूर्ण गतिविधियों से पालकों को अवगत कराना और बच्चों को प्रेरणा व उचित मार्गदर्शन प्रदान करना, पालकों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने उन्हें बच्चों को प्रगति से अवगत कराने तथा बच्चों में भविष्य की संभावनाओं को तलाश के उद्देश्य से पालक शिक्षक मेगा बैठक किया गया था।देवभोग विकास खण्ड के प्रत्येक संकुल केंद्रों में संकुल स्तरीय पालक शिक्षक मेगा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में जनप्रतिनिधियों, पालकों, शिक्षक, शाला प्रबंधन विकास समिति व अन्यों को शामिल किया गया। इस बीच उपस्थित विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी देवनाथ बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग के निर्देश पर शिक्षा सत्र -2020 में शिक्षा नीति में बदलाव आया है,उसी के अनुरूप शिक्षक पालक का संवाद हमेशा बना रहे। उन्होंने बच्चों को आहृवान किया कि पढ़ाई के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करें, और अपने आप में एक गर्व महसूस करें कि मुझे पढ़ना है, आगे बढ़ना है, इस ध्येय से पढ़ाई करें। तत्पश्चात उपस्थित सभी अभिभावकों से भी यह कहा कि बच्चों को पढ़ने के लिए एक शांत माहौल ज़रूर उपलब्ध कराए ताकि बच्चे पढ़ने लिखने में कोई बिग्न बाधा उत्पन्न न हो। ओर बच्चों से पढ़ाई के संबंध में जानकारी लेते रहे, अनायास स्कूल से अनुपस्थित होने पर मोबाइल के माध्यम से पढ़ाई जरूर कराएं।बता दें कि देवभोग विकास खण्ड में 21 संकुल केंद्र में संकुल स्तरीय पालक शिक्षक मेगा बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्याओं में पालक शिक्षक व जनप्रतिनिधि की उपस्थिति प्रार्थनीय रही है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में बदलाव आया है वह मुख्यतः निम्नलिखित हैं – बालवाड़ी में पढ़ाई शाला के लिए तैयारी, घर की भाषा में शिक्षा, खिलौने से सिखाना, शाला त्यागी बच्चे को मुख्य धारा से जोडना, मंदबुद्धि बच्चों के लिए विशेष उपचारात्मक कक्षाओं का आयोजन, शाला विकास। प्रबंधन समिति का गठन, सभी बच्चे में मूल तत्व दक्षताओं का विकास, शालाओं में पौधारोपण व पोषण वाटिका तैयार करना, मुस्कान पुस्तकालय का बेहतर उपयोग,बस्ता विहीन शनिवार अनुभव से समझ के साथ सीखना, बच्चों के लिए समग्र प्रगति कार्य पर चर्चा किया जाना।
इन तमाम विषयों में विस्तृत रूप से प्रत्येक संकुल केंद्रों में इन 12 बिंदुओं पर बारी बारी से शिक्षकों ने पालकों व शिक्षा समितियों के समक्ष चर्चा किया गया।

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