6 से 7 बार हो चुके चुनाव, सरपंच से लेकर सरकारें बदलीं पर नहीं बदली बागपारा की किस्मत

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गरियाबंद–:–एक ओर जहां देश डिजिटल इंडिया और सुशासन का डंका पीट रहा है, वहीं छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से विकास के दावों की हवा निकालती एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। मैनपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सरगीगुड़ा का आश्रित ग्राम बागपारा आज भी मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी से जूझ रहा है। इस पारा में लगभग 25 से 30 परिवार निवास करते हैं, जिन्हें यहाँ रहते हुए 25 से 30 साल बीत चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि देश की आजादी के 79 साल बाद भी यह गांव बिजली और पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है।

अंधेरे के साए में कट रही रातें, लालटेन और ढिबरी ही एकमात्र सहारा

तकनीक और आधुनिकता के इस दौर में भी बागपारा के ग्रामीण ढिबरी और मोमबत्ती के भरोसे रात काटने को मजबूर हैं। गांव में आज तक बिजली का एक खंभा भी नहीं खड़ा किया जा सका है। बिजली न होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है, जिनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इसके साथ ही वनांचल क्षेत्र होने के कारण रात के समय ग्रामीणों को हमेशा जहरीले जीव-जंतुओं और सांप-बिच्छू का डर सताता रहता है।

पक्की सड़क का नामोनिशान नहीं, बीमार होने से खाट पर ले जाने की नौबत

बिजली की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों के पास मुख्य मार्ग तक जुड़ने के लिए एक अदद सड़क तक नहीं है। ग्रामीण आज भी खेतों की संकरी मेड़ों से होकर आवागमन करने को मजबूर हैं। बारिश के दिनों में यह मेड़ें दलदल में तब्दील हो जाती हैं, जिससे पूरा पारा टापू बन जाता है। ऐसी स्थिति में यदि कोई ग्रामीण गंभीर रूप से बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो, तो उन्हें खाट पर लादकर या पैदल ही दलदल पार करना पड़ता है।

जनप्रतिनिधियों के छलावे से नाराजगी, 6-7 बार चुनाव के बाद भी हाथ लगी सिर्फ मायूसी

ग्रामीणों का आक्रोश स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के खिलाफ चरम पर है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव बसने के बाद से अब तक यहाँ लगभग 6 से 7 बार चुनाव (पंचायत, विधानसभा और लोकसभा) हो चुके हैं। हर चुनाव में सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत प्रतिनिधि और खासकर भाजपा व अन्य दलों के बड़े-बड़े नेता वोट बैंक के चक्कर में यहाँ आते हैं और विकास की बड़ी-बड़ी डीगें हांकते हैं। लेकिन चुनाव जीतते ही वे अपने वादों से मुकर जाते हैं और गांव की सुध लेना छोड़ देते हैं।

ग्रामीणों की दोटूक चेतावनी: “अगर अब काम नहीं हुआ, तो करेंगे चुनावों का पूर्ण बहिष्कार”

निराश और आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि इतने सालों में कई सरपंच बदले और प्रदेश में सरकारें भी बदल गईं, लेकिन हमारी किस्मत जस की तस बनी हुई है। उन्होंने शासन-प्रशासन से सवाल किया है कि आखिर कब तक बागपारा के लोग इन मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते रहेंगे? ग्रामीणों ने अब दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों ने जल्द ही सड़क और बिजली का काम शुरू नहीं कराया, तो वे आने वाले समय में उग्र आंदोलन करेंगे और आगामी सभी चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।

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