गरियाबंद में खाद संकट: सहकारी समितियों में ‘नो स्टॉक’, पड़ोसी राज्य ओडिशा से ऊंचे दामों में खाद खरीदने को मजबूर

गरियाबंद में खाद संकट: सहकारी समितियों में ‘नो स्टॉक’, पड़ोसी राज्य ओडिशा से ऊंचे दामों में खाद खरीदने को मजबूर

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गरियाबंद में खाद संकट: सहकारी समितियों में ‘नो स्टॉक’, पड़ोसी राज्य ओडिशा से ऊंचे दामों में खाद खरीदने को मजबूर

अमलीपदर–:–छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन के आते ही किसानों के सामने खाद (उर्वरक) का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है。

प्रदेश की सरकारी सहकारी समितियों में डीएपी (DAP) और यूरिया का स्टॉक खत्म (कम मात्रा)होने के कारण सीमावर्ती जिलों के किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अपनी फसलों को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ के किसान अब पड़ोसी राज्य ओडिशा का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें मजबूरी में तय सरकारी कीमतों से कहीं अधिक ऊंचे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है。

ओडिशा बॉर्डर पर खाद की कालाबाजारी और तस्करी तेज हो गई हैं गरियाबंद के तेतलखुटी धूगियामुडा उड़ीसा सीमावर्ती से लगातार खाद सायकल, मोटर सायकल चार पहिया वाहन से आ रहा हैं。

इस संकट का फायदा उठाकर सीमा पर सक्रिय खाद माफिया और तस्कर सक्रिय हो गए हैं ,प्राइवेट डीलर और तस्कर संकट का फायदा उठाकर खुली लूट मचा रहे हैं:यूरिया: जिसकी सरकारी कीमत ₹266 प्रति बोरी निर्धारित है, उसे निजी दुकानों और सीमा पार के डीलरों द्वारा ₹800 से ₹1,000 तक में बेचा जा रहा है।डीएपी (DAP): सोसायटियों में अनुपलब्ध होने के कारण बाजार में इसकी कीमत ₹2,000 से ₹2,200 तक वसूली जा रही है।धान की बोआई और रोपाई का समय निकला जा रहा है। अगर सही समय पर खेतों में खाद नहीं डाली गई, तो उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा。

इसी मजबूरी का फायदा उठाकर ओडिशा के व्यापारी छत्तीसगढ़ के किसानों से उच्च दामों पर बेच रहे हैं

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