ग्रामीण अंचलों में बारिश के मौसम से नालों की अस्वच्छता जलभराव खतरनाक बीमारियों को न्योता दे रही है

ग्रामीण अंचलों में बारिश के मौसम से नालों की अस्वच्छता जलभराव खतरनाक बीमारियों को न्योता दे रही है

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✍🏻”लोकहित 24न्यूज़ एक्सप्रेस लाइव” प्रधान संपादक– सैयद बरकत अली की रिपोर्ट गरियाबंद (छत्तीसगढ़)

 

ग्रामीण अंचलों में बारिश के मौसम से नालों की अस्वच्छता जलभराव खतरनाक बीमारियों को न्योता दे रही है

 

गरियाबंद –:–मौसम ऋतु चक्र के तहत धीरे-धीरे मौसम परिवर्तन होने जा रही है, और अभी कुछ ही दिनों बाद जून महीने आने वाली है इसी के साथ बारिश का मौसम आने वाली है। इस दरम्यान ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक गांवों में नलकूप खनन किया गया है, इन नलकूपों से ग्रामीण जनताओं को खाने पीने व अन्य सुविधाओं के लिए उपलब्ध कराई गई है। कुछ लोग पानी को अनियमितता बरती जाने की वजह से बाहर इधर-उधर नितार होती है। तथा गांवों के बीच सड़कों व गलियों में अस्वच्छता बहाव से गांव गंदगी से लतपथ होकर अनेकों रोग बीमारियों को न्योता देने में कोई कसर नही छोड़ते हैं। इसीलिए ग्रामीण जनों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के मौसम आने के पहले नालों की साफ-सफाई किया जाना अत्यंत आवश्यक है। अभी तक कुछ गांवों में नाला साफ सफाई अस्वच्छता, जलभराव आदि का कार्यों पर पंचायत के कर्मियों ने स्वच्छता के पटरी पर कदम नहीं रखें गए हैं। बरसात के समय जलभराव की समस्या आती है। जिससे ग्रामीण को निजात पाने के लिए व ग्रामीणों को इस समस्या का सामना न करना पड़े,इसको लेकर स्वच्छता विभाग के अधिकारी से सभी पंचायत कर्मचारी चर्चा कर नालों की साफ-सफाई में नियमित स्वच्छता कार्यों को लेकर जुट जाना चाहिए। ऐसे बहुत सारे गांवों में नाला साफ सफाई, गंदगी पानी, कूड़ा झिल्लियों को सार्वजनिक स्थलों, मुख्य आवागमन मार्गों पर फेंकी जाती है। वह गंदगी अवशिष्ट पदार्थ बरसता के मौसम में बारिश की बहती हुई पानी में घुलनशील होकर सीधे गढ्ढे नाले में मिल जाती है। जिससे नाले में अस्वच्छता जलभराव होने के कारण नाले का गंदगी पानी सड़न, बदबू आती है, और उसी जगह पर अनेक वायरस की उत्पत्ति होती है। नालों में अस्वच्छता जलभराव होने से बरसता मौसम में सबसे अधिक डेंगू ,चिकन गुनिया,मादा एनीफिलिन मच्छरों के काटने से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती करवायें जातें है। जब बारिश का मौसम जैसे ही जाती है। ओर उस दरम्यान कुछ दिनों तक लगातार पानी बरसता होती है, तो लोगों के मुख से मादा एनीफिलिन मच्छर काटने का शिकायत ज्यादा सुनने को मिलती है ‌।जिसकी वजह से गांव में मलेरिया, टाइफाइड,अनेक जीवाणु वायरस फैलने लगती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जीवाणु वायरस फैलने के मुख्य स्रोत है –
ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं होते और सार्वजनिक स्थलों, घरों के आमने-सामने किनारे, बीच चौराहे पर अपशिष्ट पदार्थ, घर के कूढ़े कच्चरें ,झिल्लियों को फेक दिया जाता है।इन फेकी गई गंदगियों में जीवाणु वायरस, बैक्टीरिया पनपते है और लोगों को हमला करने में चुकते नहीं है।
इसी लिए अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के व्यक्ति बीमारियों से पीड़ित हो कर ग्रसित होते हैं। सही समय पर यदि अस्वच्छता ओर स्वच्छता दोनों को ध्यान नहीं दिया जाता है,तो मानव जीव जगत के लिए खतरा बना रहता है।इन सारी समस्या को दूर करने में गांव -गांव में नियुक्त किया गया स्वच्छता समिति सदैव अलर्ट रहना चाहिए। और गांव में स्वास्थ्य, स्वच्छता के प्रति एक विशेष पहल किया जाना चाहिए। ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी पानी, कूड़ा कच्चरा झिल्लियों को स्कूलों, घरों व सार्वजनिक स्थलों पर न फेंकें। इसके लिए मितानिनों को घर- घर जाकर आम नागरिकों को गंदगी करने व फेंकने से होने वाली जीव प्रकोपों जोकि हमारे शरीर को जो नुक़सान पहुंचाती है उन्हीं के बारे में जागरूक करना चाहिए। क्यों कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता का रख-रखाव व निगरानी करने का पूरा उत्तरदायित्व मितानिनों को कार्वाह दिया गया है। यदि मितानिन अपने -अपने गांवों में स्वच्छता को जोर दिया जाता है तो कभी भी गांव में गंदगी पानी कूड़ा कच्चरा,व झलकियां अनेक प्रकार के गंदगियों पर रोक लगाई जा सकती है। इसी तरह गांव को स्वस्थ, स्वच्छ व गंदगी से मुक्त ग्राम सरकार के द्वारा घोषित किया जा सकता है।यह तब संभव होगा जब हम अपने गांवों को स्वच्छता के प्रति सचेत रहना होगा। कभी भी गांव में गंदगी को पनपने देना नहीं है। कुछ ही सालों में यह देखने को मिला है गांव में गंदगी, कूड़ा कच्चरा झिल्लियों व खुले में शौच करने से माहिर गांवों को स्वच्छता विभाग द्वारा निर्मल ग्राम पुरस्कार दिया गया है। गांवों में हो रही है गंदगी उधर कर्मचारी अपने दिखावे के लिए कागज़ी में गंदगी से मुक्त ग्राम घोषित कर दिया गया है,इस तरह नहीं होने चाहिये। चुकी ऐसा करने से जनता को धोखा देने जैसा ही प्रतीत होता है।इन धोखे की वजह से गांव में आम नागरिकों को बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। दुखित ग्रामीण जनों को इसका भूक्तमान होना पड़ता है।
इसी लिए वास्तविक रूप को अपनाया जाए और दिखावे को लुप्त किया जाए। इसी में जग की भलाई है।

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