आईएसबीएम विश्वविद्यालय में ध्वजारोहण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम

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छुरा/गिधनी–:–आईएसबीएम विश्वविद्यालय परिसर में 79 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह अत्यंत धूमधाम से मनाया गया। इस पूरे आयोजन में देशभक्ति की भावना, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय चेतना की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सदस्य प्रो. व्यास दुबे के द्वारा ध्वजारोहण किया गया जिनका साथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद महलवार ने दिया।
सीजीपीयूआरसी के सदस्य प्रो. व्यास दुबे ने अपने वक्तव्य में भारतीय सांस्कृतिक दर्शन की गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने रामायण के अमर वाक्य “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” को उद्धृत करते हुए कहा कि मातृभूमि केवल एक भूभाग नहीं, वह चेतना है, वह संस्कृति है, जिसे हम जीते हैं। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि “आदमी जो चाहे सो बन सकता है, बस उसके भीतर दृढ़ इच्छा शक्ति होनी चाहिए।” यह विचार उस आत्मनिर्भर भारत की नींव है, जिसकी कल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी।इस अवसर पर शहीद होमेश्वर अमात की पुण्य स्मृति को ससम्मान नमन किया गया। उनकी माँ श्रीमती बुधियारिन की उपस्थिति ने आयोजन को ऊँचाई प्रदान की। इस अवसर पर उन्हें सम्मानित भी किया गया।कुलपति प्रो. आनंद महलवार ने अपने संबोधन में समसामयिक संदर्भों को छूते हुए कहा कि “डिजिटली ग्लोबलाइजेशन” की तीव्र धारा में हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान को न खोने देने की सजगता चाहिए।उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि हम सचेत रहेंगे तो दोनों सहयात्री की तरह होंगे।कुलसचिव डॉ. बी. पी. भोल ने वैश्विक परिदृश्य की ओर इशारा करते हुए कहा कि “एक नई दुनिया हमारा पीछा कर रही है।” उन्होंने ‘ग्लोबल विलेज’ के विचार को यथार्थ बताते हुए भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता को अक्षुण्ण बनाए रखने का आह्वान किया।डॉ. एन. कुमार स्वामी, शैक्षणिक अधिष्ठाता एवं आइक्यूएसी डायरेक्टर ने कहा कि “कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। हर कर्म यदि राष्ट्रसेवा की दृष्टि से किया जाए, तो वह साधना बन जाता है।” प्रो. शुभाशीष बिस्वास, छात्र कल्याण अधिष्ठाता ने ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की दूरियों को पाटने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि “भारत की आत्मा गाँवों में बसती है, और जब तक गाँव समृद्ध नहीं होंगे, स्वतंत्रता अधूरी रहेगी।”इस अवसर पर छात्राओं अंजली, सस्मिता, प्रियंका एवं उनकी टीम ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें भारत की विविधता, संघर्ष और समरसता का सुंदर चित्रण था। तेजराम साहू (विधि संकाय) ने राष्ट्रभक्ति पर अपना ओजस्वी भाषण दिया। इस समारोह का संचालन विज्ञान संकाय के श्री लक्ष्मीकांत सिन्हा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन कला एवं मानविकी संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ दिवाकर तिवारी ने किया।अंत में गोविंदा नेताम के द्वारा वंदे मातरम गाकर कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।

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