दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥”

दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥”

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“दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥”


नानपारा05 जून 2026–:–
इसी शाश्वत संदेश को आत्मसात करते हुए, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 59वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी), नानपारा द्वारा एक वृहद ‘महा-वृक्षारोपण अभियान’ का आयोजन किया गया।

यह अभियान वाहिनी मुख्यालय सहित सभी अधीनस्थ सीमा चौकियों पर 59वीं वाहिनी के कमांडेंट श्री कैलाश चन्द रमोला के कुशल निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।


इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और एक हरित एवं सतत भविष्य के निर्माण में समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था।

वाहिनी मुख्यालय, नानपारा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में अधिकारियों, जवानों और ‘संदीक्षा’ की सदस्याओं ने पूरे उत्साह के साथ पौधरोपण किया। इस अवसर पर वृक्षों के महत्व, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु संतुलन और स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता पर सारगर्भित चर्चा की गई। उपस्थित सभी लोगों ने केवल पौधे लगाने का ही नहीं, बल्कि रोपे गए पौधों के संरक्षण और उनकी नियमित देखभाल का दृढ़ संकल्प भी लिया।

कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार की ‘LiFE’ (Lifestyle for Environment) पहल के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विशेष जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं। बल के अधिकारियों एवं जवानों ने स्थानीय नागरिकों तथा स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।

अधीनस्थ सीमा चौकियों पर भी जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों के सक्रिय सहयोग से सघन वृक्षारोपण किया। सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पौधे रोपे गए, जिसमें पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सामुदायिक सहभागिता (Community Participation) पर विशेष बल दिया गया।
इस अवसर पर 59वीं वाहिनी के कमांडेंट श्री कैलाश चन्द रमोला ने अपने संबोधन में कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हम में से प्रत्येक नागरिक की सर्वोच्च नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने सभी से अधिकाधिक वृक्ष लगाने और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सहेजने का आह्वान किया।
यह महा-अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ, बल्कि इसके माध्यम से सशस्त्र सीमा बल और सीमावर्ती नागरिकों के मध्य आपसी विश्वास, सहयोग और जन-सहभागिता का रिश्ता भी और अधिक प्रगाढ़ हुआ है।
जारीकर्ता:
प्रचार अधिकारी
59वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल, नानपारा

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