पीएम आवास योजना हितग्राही स्वर्गीय पदुचरण नागेश का पत्नी जमुना बाई नागेश उत्तराधिकारी योजना की लाभ से वंचित

पीएम आवास योजना हितग्राही स्वर्गीय पदुचरण नागेश का पत्नी जमुना बाई नागेश उत्तराधिकारी योजना की लाभ से वंचित

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पीएम आवास योजना हितग्राही स्वर्गीय पदुचरण नागेश का पत्नी जमुना बाई नागेश उत्तराधिकारी योजना की लाभ से वंचित

गरियाबंद/देवभोग–:–जिला गरियाबंद देवभोग विकास खण्ड के ग्राम गाड़ाघाट में सरकारी फाइलों में एक आवास स्वीकृत वर्ष 2011 पीएम आवास योजना सर्वे सूची में पदुचरण नागेश पिता गोनचू नागेश का नाम दर्ज है, और इनका नाम सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना सर्वे सूची में रहवासी सरल क्रमांक 91 पर नाम अंकित है,व पर्ची क्रमांक 40 है, तथा बेनीफीसीई रैंक आई डी नम्बर है 2360775 है, किंतु 29/06/2014 को हितग्राही पदुचरण नागेश का निधन हो गया।जमीनी हकीकत यह है कि ग्राम पंचायत में चयन प्रक्रिया के समय सूची से नाम बाहर हटा दिया गया है। जबकि नियमावली में संशोधन अर्थात हितग्राही के उत्तराधिकारी को लाभ मिलना चाहिए। ऐसा न कर ग्राम पंचायत ने सीधे नाम हटाकर उतराधिकारी का हक को मरोड़ दिया गया। चुकी जिस व्यक्ति के नाम पर आवास स्वीकृत हुआ था, अब उसकी 2014 में निधन हो गई ,और उसके बाद उसकी पत्नी जमुना बाई नागेश पिछले कई सालों से अपने ही अधिकार के लिए सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगा लगा कर वो मजबूर हैं।
यह मार्मिक मामला देवभोग के ग्राम पंचायत गाड़ाघाट का है, जहां स्वर्गीय पदुचरण नागेश पिता गोनचू नागेश के परिवार को पक्के मकान का सपना सरकारी प्रक्रियाओं में उलझकर रह गई है। जमुना बाई नागेश ने बताई कि पति के निधन के बाद पीएम आवास योजना में मेरी नाम जुड़नी चाहिए । लेकिन उम्मीद थी ,कि शासन-प्रशासन द्वारा स्वीकृत आवास में मेरी नाम जुड़ जाएगी, और इस योजना का लाभ पत्नी को मिलेगी जिससे कि सुरक्षित छत बनेगी। लेकिन कई साल बीत चुके हैं इस योजना से संबंधित विभाग ने उतराधिकारी को नाम जोड़ने के वजह उल्टा नाम को हटा दिया गया है।गांव के लोगों का कहना है कि , जमुना बाई नागेश ने ग्राम पंचायत से लेकर विभागीय कार्यालय तक गुहार लगाई है। आवेदन पत्र के साथ पुरी दस्तावेज जमा कर चुकी हैं, स्थानीय कर्मचारी से मुलाकात कर उनके पास दस्तावेज जमा किए गए है, लेकिन अभी तक कोई भी परिणाम नहीं निकला रही है। मेरी स्वर्गीय पति पदुचरण नागेश के नाम पर आवास स्वीकृत हुआ है, और निधन के दौरान मौके पर उक्त पंचायत कर्मियों ने नाम को विलोपित कर दिया है। यदि वह पीएम आवास मुझे मिल जाता तो मैं अपने परिवार के साथ आवास पर दिनचर्या गुजरती और परिवार का जीवन उसी पुराने कच्चे मकान में जिंदगी गुजारने के बदले छत वाली मकान में रहने का सपना साकार होता।

परिवार पानी बरसात में भीगते अस्त-व्यस्त, सपना देखा एक पल में बिखरा

ग्रामीणों ने बताया कि परिवार जिस मकान में रहते हैं तो वह हालात अच्छी नहीं है। पानी बरसता में घर की छत टपकती है, और मौसम इस परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है। नामिनी जमुना बाई नागेश ने कहा कि जैसे ही मेरी पति का निधन हो गई तो, कुछ वर्षों बाद बिना पूछे ही वह नाम को हटा दिया है, लेकिन इसकी जानकारी जनपद पंचायत देवभोग मुख्यकार्यकारी अधिकारी को भी अवगत करा चुकी।अभी तक कुछ भी सुनवाई नहीं हो रहा है। यदि फाइल शासकीय कार्यालयों में खामोश पड़ी रहती है तो आगे मेरी ज़िन्दगी में क्या -क्या घटनाएं गुजरेगी इसका अंदाजा कोई लगा सकते है। शासन -प्रशासन से गुहार लगाते उन्होंने बताई कि पति की मकान में पत्नी का अधिकार है, और जिंदगी गुजारना यही नियम है। शुरू से अंत तक पति-पत्नी दोनों एक दूसरे के लिए बनें है।कि पति का अंचल संपत्ति हो या सरकारी योजनाओं का लाभ पति का निधन हो जाए तो पत्नी को मिलेगी ,और यदि पत्नी की निधन हो जाए तो पति को योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। लेकिन ग्राम पंचायत गाड़ाघाट में सरकारी योजनाओं पर लाभान्वित होने से जमुना बाई नागेश वंचित रह गई है। जमुना बाई नागेश ने बताई कि यदि ग्राम पंचायत मेरी नाम पर आवास स्वीकृत नहीं होता है तो जिला प्रशासन कलेक्टर कार्यालय में जनचौपाल में जाकर उक्त विषयों पर शिकायत करने में मजबूर हैं।

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