एक महीने से मनरेगा कर्मियों का भुगतान लंबित! मेहनतकशों की जेब खाली, सरकार के दावों पर उठे सवाल “पसीना सूख गया, लेकिन मेहनत की कमाई अब तक नहीं मिली”

एक महीने से मनरेगा कर्मियों का भुगतान लंबित! मेहनतकशों की जेब खाली, सरकार के दावों पर उठे सवाल “पसीना सूख गया, लेकिन मेहनत की कमाई अब तक नहीं मिली”

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एक महीने से मनरेगा कर्मियों का भुगतान लंबित!

मेहनतकशों की जेब खाली, सरकार के दावों पर उठे सवाल

“पसीना सूख गया, लेकिन मेहनत की कमाई अब तक नहीं मिली”

देवभोग/छत्तीसगढ़–:– मनरेगा के अंतर्गत कार्य करने वाले कर्मियों और मजदूरों का भुगतान एक महीने बीत जाने के बाद भी लंबित होने का आरोप है। इससे अनेक परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। रोज़मर्रा की जरूरतें पूरी करना कठिन होता जा रहा है और समय पर मजदूरी नहीं मिलने से लोगों में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ प्रदेश युवा कांग्रेस जिला संयोजक गिरीश कुमार बघेल ने कहा कि मनरेगा देश के गरीब, किसान और ग्रामीण मजदूरों के लिए जीवनरेखा है। यदि उन्हें समय पर उनकी मेहनत की मजदूरी नहीं मिलती, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि उनके अधिकारों की अनदेखी है।

उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर सुशासन और जनकल्याण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर मेहनतकश मजदूर अपनी ही कमाई के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि जब पसीने की कमाई समय पर न मिले, तो आम जनता के मन में सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने मांग की कि सभी लंबित भुगतान बिना किसी और देरी के जारी किए जाएं, भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए तथा भविष्य में मनरेगा कर्मियों और मजदूरों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर मजदूरी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रभावित मजदूर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए विवश होंगे।

मुख्य मांगें

– सभी मनरेगा कर्मियों और मजदूरों का लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए।
– भुगतान में देरी के कारणों को सार्वजनिक किया जाए।
– भविष्य में समयबद्ध भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
– मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

“मेहनत का सम्मान तभी, जब मजदूरी समय पर मिले।”

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