आईएसबीएम विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजननवापारा (कोसमी)

आईएसबीएम विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजननवापारा (कोसमी)

इन्हे भी जरूर देखे

आईएसबीएम विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल आयोजननवापारा (कोसमी)

छुरा–:–शिक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईएसबीएम विश्वविद्यालय, नवापारा (कोसमी), छुरा के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा दिनांक 18 जुलाई 2026 को ” आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से शिक्षकों को सशक्त बनाना: उत्पादकता, साइबर सुरक्षा एवं प्रभावी संचार” विषय पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन सेमिनार हॉल में सफलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, विभागाध्यक्ष, शोधार्थी एवं अकादमिक अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार द्वारा सभी विशिष्ट अतिथियों एवं आमंत्रित विशेषज्ञों का पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत अभियान के संदेश के साथ पॉटेड प्लांट भेंट कर सम्मान किया गया।


इसके पश्चात विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. बी. पी. भोल ने अपने उद्बोधन में शिक्षण, शोध एवं प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी एवं नैतिक उपयोग पर बल देते हुए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन के लिए IQAC एवं आयोजन समिति की सराहना की।
विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता डॉ. पी. विश्वनाथन ने उपस्थित विषय-विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए उनके शैक्षणिक, तकनीकी एवं व्यावसायिक अनुभवों का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण और नवीन तकनीकों से परिचित होना अत्यंत आवश्यक है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें शिक्षकों को विद्यार्थियों की आवश्यकता के अनुरूप अध्ययन सामग्री तैयार करने, जटिल विषयों को सरलता से समझाने और शोध गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता प्रदान कर सकती हैं।कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. राहुल कुमार सिंह द्वारा ” आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। उन्होंने चैटजीपीटी एवं अन्य आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स के प्रभावी उपयोग हेतु प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग के सिद्धांतों एवं व्यवहारिक तकनीकों को समझाया। प्रतिभागियों को यह बताया गया कि किस प्रकार उचित प्रॉम्प्ट तैयार कर उच्च गुणवत्ता वाले उत्तर, अध्ययन सामग्री, प्रश्नपत्र, पाठ योजना, मूल्यांकन सामग्री तथा शोध संबंधी सामग्री कुछ ही समय में तैयार की जा सकती है। इस सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण उपकरणों का लाइव प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
दूसरे सत्र में शैक्षणिक उत्पादकता बढ़ाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की गई। श्री अबीर कपूर ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सहायता से शोध पत्रों का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार करना, साहित्य समीक्षा, संदर्भ प्रबंधन, प्रस्तुतीकरण निर्माण, एक्सेल ऑटोमेशन, आधिकारिक पत्राचार, रिपोर्ट लेखन एवं ई-मेल लेखन जैसे कार्य अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध तरीके से किए जा सकते हैं। प्रतिभागियों को अनेक उपयोगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का प्रदर्शन कर उनके व्यावहारिक उपयोग से भी अवगत कराया गया।
दोपहर के पश्चात आयोजित तीसरे सत्र में डिजिटल कंटेंट निर्माण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई। श्री गगनदीप सिंह ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स की सहायता से टेक्स्ट, इमेज, वीडियो, ऑडियो, इन्फोग्राफिक्स एवं इंटरैक्टिव शिक्षण सामग्री अत्यंत कम समय में तैयार की जा सकती है। उन्होंने आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म्स का लाइव डेमो प्रस्तुत करते हुए शिक्षकों को आकर्षक एवं विद्यार्थी-केंद्रित डिजिटल सामग्री तैयार करने की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया।
चौथे सत्र में साइबर सुरक्षा, नैतिकता एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उत्तरदायी उपयोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय पर श्री अभिषेक शर्मा द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई। उन्होंने साइबर हमलों से बचाव, डेटा गोपनीयता, डिजिटल सुरक्षा, मजबूत पासवर्ड प्रबंधन, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक उपयोग, कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा अकादमिक ईमानदारी जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सदैव जिम्मेदारी एवं नैतिक मूल्यों के अनुरूप किया जाना चाहिए ताकि शिक्षा की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता बनी रहे।
अंतिम तकनीकी सत्र में शिक्षकों के लिए प्रभावी संप्रेषण कौशल विषय पर श्री गुणवंत साहू ने प्रभावी संप्रेषण कला, कक्षा प्रबंधन, सक्रिय श्रवण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रस्तुतीकरण, विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने की रणनीतियाँ तथा आधुनिक शिक्षण तकनीकों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि एक प्रभावी शिक्षक केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित एवं सक्रिय रूप से सीखने के लिए भी प्रोत्साहित करता है।समापन अवसर पर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी आमंत्रित विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों के बहुमूल्य मार्गदर्शन एवं योगदान के लिए उनका आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम समन्वयक श्री केशव कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने विशेषज्ञों के समन्वय, प्रतिभागियों के पंजीयन, तकनीकी व्यवस्थाओं एवं समस्त आयोजन संबंधी कार्यों का प्रभावी समन्वयन किया, जिससे कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. एन. के. स्वामी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) एवं निदेशक, IQAC ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध संस्कृति को भी सुदृढ़ बनाते हैं।सम्पूर्ण कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन डॉ. एन. के. स्वामी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) एवं निदेशक, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के कुशल निर्देशन एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। उनके नेतृत्व में आयोजित यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम अत्यंत सफल, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इन्हे भी जरूर देखे

Must Read