“खुशियों की दास्तां” स्थानीय संसाधनों को रोजगार का माध्यम बनाने की पहल

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“खुशियों की दास्तां” स्थानीय संसाधनों को रोजगार का माध्यम बनाने की पहल

बुरहानपुर–:–मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ‘‘एक जिला-एक उत्पाद’’ योजना अंतर्गत बुरहानपुर जिले के 18 स्व-सहायता समूहों की 22 दीदीयां राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम), कुंडली, सोनीपत (हरियाणा) में पाँच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटी है।

स्थानीय संसाधनों को रोजगार का माध्यम बनाने की पहल
ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 27 से 31 जुलाई, 2026 तक आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य जिले की पहचान ‘‘केला फसल’’ से प्राप्त रेशे का वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक उपयोग बढ़ाकर महिलाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर विकसित करना रहा। प्रदेश सरकार की महिला सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में यह एक पहल है।

आधुनिक तकनीक से मूल्य संवर्धित उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को केले के रेशे से मूल्य संवर्धित उत्पाद निर्माण, आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग एवं लेबलिंग, ब्रांडिंग, विपणन, व्यवसाय प्रबंधन तथा उद्यम स्थापना की व्यावहारिक जानकारी दी। साथ ही उत्पादों को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार कर बेहतर आय अर्जित करने के उपायों से भी अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण के उपरांत दीदियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें स्थानीय स्तर पर केले के रेशे सेे नए उत्पाद विकसित करने, आय में वृद्धि करने इत्यादि के संबंध में सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण मिला है। वे अपने-अपने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से इस तकनीक का उपयोग कर अन्य महिलाओं को भी जोड़ेंगी, जिससे समूहों की आय में वृद्धि होगी।

मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं जिला प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त महिला समूहों को तकनीकी मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़कर केले के रेशे आधारित सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशिक्षण प्राप्त दीदियाँ अपने अनुभव एवं कौशल का विस्तार अन्य स्व-सहायता समूहों तक करेंगी, जिससे बुरहानपुर जिले में केले के रेशे आधारित उत्पादों को नई पहचान मिलेगी।

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