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आजादी के 80 साल, सड़क अब भी कीचड़ में मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक पहुंचने वाली सड़क की कहानी सुनेंगे, तो शायद आपको विकास की एक अलग ही तस्वीर नजर आएगी।

आजादी के 80 साल, सड़क अब भी कीचड़ में मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक पहुंचने वाली सड़क की कहानी सुनेंगे, तो शायद आपको विकास की एक अलग ही तस्वीर नजर आएगी।

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आजादी के 80 साल, सड़क अब भी कीचड़ में मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक पहुंचने वाली सड़क की कहानी सुनेंगे, तो शायद आपको विकास की एक अलग ही तस्वीर नजर आएगी।

अमलीपदर–:–आजादी के 80 साल पूरे हो चुके हैं… देश चांद तक पहुंच चुका है, डिजिटल इंडिया की रफ्तार की चर्चा देश-दुनिया में हो रही है।

लेकिन गरियाबंद के मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक पहुंचने वाली सड़क की कहानी सुनेंगे, तो शायद आपको विकास की एक अलग ही तस्वीर नजर आएगी।


यहां सड़क कम और कीचड़ ज्यादा दिखाई देता है। बारिश होते ही हालात ऐसे हो जाते हैं कि दो साइकिल सवार आमने-सामने आ जाएं, तो रास्ता चुनना नहीं… बल्कि एक-दूसरे के लिए रास्ता छोड़ने का समझौता करना पड़ता है।

कैमरे में दिखाई दे रही ये तस्वीरें गरियाबंद के मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक जाने वाले रास्ते की हैं। बारिश ने सड़क की हालत को इस कदर बिगाड़ दिया है कि लोगों के लिए यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं।


कहीं साइकिल के पहिए कीचड़ में धंस रहे हैं, तो कहीं फिसलन लोगों को गिरने पर मजबूर कर रही है। दोपहिया वाहन चलाने वालों के लिए तो यह रास्ता मानो रोजाना जोखिम का सफर बन चुका है।
और सबसे बड़ी परेशानी उन बच्चों के सामने है, जिन्हें इसी रास्ते से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है।

सोचिए… जिन बच्चों के हाथों में किताब और कॉपी होनी चाहिए, उनके सामने स्कूल पहुंचने से पहले सड़क पार करने की चुनौती है। बारिश के दिनों में कई बार साइकिल फिसलती है, कपड़े खराब होते हैं और कीचड़ में पहिए फंस जाते हैं।

सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं है। सवाल उन बच्चों के भविष्य का भी है, जिनके सपने इसी रास्ते से होकर स्कूल तक पहुंचते हैं।

सरकार विकास की बड़ी-बड़ी तस्वीरें दिखाती है। सड़क, डिजिटल इंडिया और आधुनिक सुविधाओं की बातें होती हैं। लेकिन मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा का यह रास्ता उन दावों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

आखिर विकास की पक्की सड़क यहां तक पहुंचने से पहले ही क्यों रुक गई?

ग्रामीणों की मांग है कि मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक सड़क का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि बारिश के मौसम में आवागमन के लिए उन्हें हर दिन संघर्ष न करना पड़े।

तो सवाल सीधा है—
आजादी के 80 साल बाद भी क्या मुड़गेल माल से दाबरीगुड़ा तक एक अदद पक्की सड़क के लिए ग्रामीणों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

या फिर इस कीचड़ भरी तस्वीर को देखकर जिम्मेदारों की नींद खुलेगी और विकास की पक्की सड़क आखिरकार गांव तक पहुंचेगी?

 

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