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जल संरक्षण से आजीविका संवर्धन तकः गरियाबंद में वाटरशेड परियोजनाओं को मिलेगा नया विस्तार कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 के जिला स्तरीय समिति की बैठक संपन्न वॉटरशेड के कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के दिए निर्देश

जल संरक्षण से आजीविका संवर्धन तकः गरियाबंद में वाटरशेड परियोजनाओं को मिलेगा नया विस्तार कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 के जिला स्तरीय समिति की बैठक संपन्न वॉटरशेड के कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के दिए निर्देश

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जल संरक्षण से आजीविका संवर्धन तकः गरियाबंद में वाटरशेड परियोजनाओं को मिलेगा नया विस्तार
कलेक्टर श्री रणबीर शर्मा की अध्यक्षता में डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 के जिला स्तरीय समिति की बैठक संपन्न
वॉटरशेड के कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण करने के दिए निर्देश

गरियाबंद -:-23 सितंबर 2026/ जिले में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 3.0 (जलसम्भर विकास घटक-प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0) के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं को गति देने के लिए जिला स्तरीय डब्ल्यूसीडीसी (जलसम्भर प्रकोष्ठ-सह-आंकड़ा केंद्र) समिति की बैठक मंगलवार को कलेक्टोरेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर सह अध्यक्ष डब्ल्यूसीडीसी श्री रणबीर शर्मा ने की। बैठक में जिले के अंतर्गत तैयार वाटरशेड प्रारंभिक परियोजना प्रतिवेदन के अनुमोदन तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ने वाटरशेड परियोजनाओं को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखते हुए जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत करने वाले समग्र मॉडल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। बैठक में उप संचालक कृषि सह परियोजना प्रबंधक डब्ल्यूसीडीसी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं डब्ल्यूसीडीसी समिति के सदस्य मौजूद रहे।

जिले में 514 सूक्ष्म जलसम्भर क्षेत्र, 143 उच्च प्राथमिकता वाले –
बैठक में जिले में जल सम्भर क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की गई। बताया गया कि जिले में कुल 514 सूक्ष्म जलसम्भर क्षेत्र हैं, जिनमें से 143 उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
कलेक्टर ने समेकित जलसम्भर प्रबंधन कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय जलसम्भर विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वन क्षेत्रों में भी जलसम्भर आधारित कार्यों की कार्ययोजना तैयार करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। वन क्षेत्रों में जल संरक्षण के कार्य होने से गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के लिए जल की उपलब्धता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।

तीन परियोजनाओं में 49 माइक्रोवाटर शेड होंगे शामिल –
बैठक में जिले में प्रस्तावित तीन जलसम्भर परियोजनाओं की जानकारी ली गई। इन परियोजनाओं के अंतर्गत क्रमशः 11, 17 एवं 21, यानी कुल 49 माइक्रोवाटर शेड कार्य शामिल किया जाना प्रस्तावित है। जलसम्भर विकास से संबंधित कार्यों के लिए लगभग 62 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत/प्रस्तावित होने की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने प्रस्तावित परियोजनाओं में आजीविका गतिविधियों को प्रभावी रूप से शामिल करने तथा ग्रामीणों की आय बढ़ाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने ऊपरी ढाल से घाटी तक की अवधारणा के अनुरूप कम से कम एक आदर्श परियोजना विकसित कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नई जलसम्भर परियोजनाओं में पूर्व में स्वीकृत अथवा संचालित योजनाओं के कार्यों का दोहराव नहीं होना चाहिए। परियोजना के लिए स्थल का चयन स्थानीय आवश्यकता और जल संरक्षण की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाए। उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं के कार्यों को गंभीरता और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए तथा जल संरक्षण के लिए निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप ही कार्यों का चयन और क्रियान्वयन हो।

जल संरक्षण के साथ पर्यावरण और आजीविका पर भी जोर –
जलसम्भर परियोजनाओं के माध्यम से वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्य किए जाएंगे। कलेक्टर ने उत्पादन प्रणाली को बेहतर बनाने तथा ग्रामीणों को परियोजनाओं से अधिक से अधिक आजीविका संबंधी लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने गरियाबंद जिले में वाटरशेड विकास का एक प्रभावी आदर्श परियोजना तैयार करने के निर्देश देते हुए कहा कि परियोजना के परिणाम जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने चाहिए। जलसम्भर से जुड़े कार्यों को गरियाबंद एवं मैनपुर क्षेत्र में प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में परियोजनाओं के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों के लिए परियोजना समूहों के गठन एवं ग्रामीणों की सहभागिता पर भी चर्चा की गई। आजीविका आधारित गतिविधियों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित कर उन्हें जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जोड़ने पर जोर दिया गया।

पीएम आशा योजना की भी हुई समीक्षा –
बैठक में पीएम आशा योजना के अंतर्गत धान के अतिरिक्त अन्य फसलों की खरीद की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। विशेष रूप से अरहर एवं उड़द की खरीद के संबंध में जानकारी ली गई और किसानों को वैकल्पिक फसलों की खरीद व्यवस्था का लाभ सुनिश्चित करने से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।

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