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1 लाख 79 हजार 717 से बढ़कर 2 लाख 19 हजार 980 राशनकार्ड दूर-दराज के गांवों और वनांचल क्षेत्रों से डिजिटल व्यवस्था तक, खाद्य सुरक्षा के सफर में बदली व्यवस्था और बढ़ी सुविधाएं कागजी रजिस्टर से ई-पॉस और ऑनलाइन मॉनिटरिंग तक, तकनीक के इस्तेमाल से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बढ़ी पारदर्शिता

1 लाख 79 हजार 717 से बढ़कर 2 लाख 19 हजार 980 राशनकार्ड दूर-दराज के गांवों और वनांचल क्षेत्रों से डिजिटल व्यवस्था तक, खाद्य सुरक्षा के सफर में बदली व्यवस्था और बढ़ी सुविधाएं कागजी रजिस्टर से ई-पॉस और ऑनलाइन मॉनिटरिंग तक, तकनीक के इस्तेमाल से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बढ़ी पारदर्शिता

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1 लाख 79 हजार 717 से बढ़कर 2 लाख 19 हजार 980 राशनकार्ड
दूर-दराज के गांवों और वनांचल क्षेत्रों से डिजिटल व्यवस्था तक, खाद्य सुरक्षा के सफर में बदली व्यवस्था और बढ़ी सुविधाएं
कागजी रजिस्टर से ई-पॉस और ऑनलाइन मॉनिटरिंग तक, तकनीक के इस्तेमाल से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बढ़ी पारदर्शिता

गरियाबंद-:- 24 सितंबर 2026/ जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। गरियाबंद जिले में 2013 में लगभग 1 लाख 79 हजार 717 राशनकार्ड थे। जिले में उस समय दूर-दराज के गांवों, वनांचल और पहाड़ी क्षेत्रों तक खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की पहुंच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण था। क्योंकि उस दौरान जिले के कुछ क्षेत्र काफी दूर्गम स्थलों पर था। शासन के निर्देशानुसार जिला प्रशासन एवं खाद्य विभाग द्वारा राशनकार्ड से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पात्र परिवारों को व्यवस्था से जोड़ने और उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए लगातार प्रयास किए गए। शिविरों और अन्य माध्यमों से लोगों को योजनाओं की जानकारी दी गई तथा राशनकार्ड से संबंधित समस्याओं का समाधान किया गया।
वर्ष 2013 में 1 लाख 79 हजार 717 राशनकार्ड से शुरू हुआ सफर वर्तमान में 2 लाख 19 हजार 980 राशनकार्ड तक पहुंच चुका है। इस दौरान 40 हजार 263 नए राशनकार्ड परिवार खाद्य सुरक्षा से जुड़े हुए हैं। खाद्य अधिकारी जन्मेजय नायक ने बताया कि पहले राशन वितरण से संबंधित जानकारी और निगरानी के लिए कागजी रजिस्टर और फाइलों पर निर्भर रहना पड़ता था। राशन नहीं मिलने की शिकायतें लेकर हितग्राही कार्यालय पहुंचते थे। विशेष रूप से प्रवासी मजदूरों को दूसरे स्थानों पर काम करने के दौरान राशन प्राप्त करने में परेशानी होती थी, क्योंकि उस समय राशन दुकान की स्थानीय व्यवस्था पर निर्भरता अधिक थी। स्टॉक की जानकारी समय पर नहीं मिलने से वितरण में देरी होती थी।
वर्तमान में जिले की 371 शासकीय उचित मूल्य दुकानों की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जा रही है। ई-पॉस मशीनों के माध्यम से हितग्राहियों का डिजिटल और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण कर राशन का वितरण किया जाता है। वन नेशन वन राशन कार्ड की पोर्टेबिलिटी सुविधा से प्रवासी हितग्राहियों को भी सुविधा मिली है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग से स्टॉक के उठाव, भंडारण और वितरण की जानकारी पर नजर रखना आसान हुआ है। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से गड़बड़ियों की पहचान और आवश्यक कार्रवाई में भी सुविधा मिल रही है।

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