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नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म के दोषी सौतेले पिता को आजीवन कारावास विशेष न्यायालय गरियाबंद ने लगाया 20 हजार रुपये का अर्थदण्ड

नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म के दोषी सौतेले पिता को आजीवन कारावास विशेष न्यायालय गरियाबंद ने लगाया 20 हजार रुपये का अर्थदण्ड

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नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म के दोषी सौतेले पिता को आजीवन कारावास
विशेष न्यायालय गरियाबंद ने लगाया 20 हजार रुपये का अर्थदण्ड

गरियाबंद-:-04 नवम्बर 2026/ नाबालिग पुत्री के साथ मारपीट, जान से मारने की धमकी देकर लगातार दुष्कर्म करने के मामले में विशेष न्यायालय गरियाबंद ने आरोपी सौतेले पिता (55 वर्ष) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती गंगा पटेल ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषसिद्ध ठहराते हुए उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया है।
प्रकरण के संबंध में विशेष लोक अभियोजक हरि नारायण त्रिवेदी ने बताया कि पीड़िता के चचेरे भाई द्वारा थाना अमलीपदर में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत के अनुसार, पीड़िता के जन्म के बाद उसकी मां ने आरोपी से विवाह कर लिया था। लगभग दो वर्ष पूर्व मां की मृत्यु के बाद पीड़िता आरोपी के साथ रह रही थी। 10 सितंबर 2025 को आरोपी के पड़ोसी ने पीड़िता के चचेरे भाई को फोन कर बताया कि आरोपी उसके साथ मारपीट करता है। सूचना मिलने पर परिजन आरोपी के घर पहुंचे, जहां पीड़िता ने बताया कि उसका सौतेला पिता मारपीट एवं धमकी देकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म करता है। आरोपी द्वारा पीड़िता को परिजनों के साथ भेजने से भी मना कर दिया गया था।
शिकायत के आधार पर थाना अमलीपदर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़िता को आरोपी के घर से थाने लाकर पूछताछ की। पीड़िता हिंदी भाषा समझने एवं बोलने में असमर्थ थी, इसलिए गोंडी एवं हल्बी भाषा जानने वाली दो महिला अनुवादकों की सहायता से उसके कथन दर्ज कराए गए। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि आरोपी लगभग एक वर्ष से उसके साथ लगातार मारपीट एवं दुष्कर्म कर रहा था तथा किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देता था। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार किया तथा न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपराध प्रमाणित करने के लिए कुल 12 साक्षियों के बयान कराए गए।
न्यायालय ने पीड़िता एवं गवाहों के कथनों, उम्र संबंधी रेडियोलॉजिकल जांच तथा चिकित्सा रिपोर्ट सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। न्यायालय ने नाबालिग पीड़िता का संरक्षक होने के बावजूद उसके साथ गंभीर अपराध करने के मामले में आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत आजीवन कारावास, अर्थात शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक कारावास तथा 20 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया।

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