[gtranslate]

रसोई में नाबालिग बच्चे! कुकर ब्लास्ट से झूलसे दो पढ़ने वाले नाबालिक रसोईया!कुकर ब्लास्ट नहीं हुआ तो बच्चों को इतनी गंभीर चोट कैसे लगी?19 सितंबर की घटना के 20 दिन बाद भी सवाल कायम—रसोई में बच्चे कर क्या रहे थे?

रसोई में नाबालिग बच्चे! कुकर ब्लास्ट से झूलसे दो पढ़ने वाले नाबालिक रसोईया!कुकर ब्लास्ट नहीं हुआ तो बच्चों को इतनी गंभीर चोट कैसे लगी?19 सितंबर की घटना के 20 दिन बाद भी सवाल कायम—रसोई में बच्चे कर क्या रहे थे?

इन्हे भी जरूर देखे

रसोई में नाबालिग बच्चे! कुकर ब्लास्ट से झूलसे दो पढ़ने वाले नाबालिक रसोईया!कुकर ब्लास्ट नहीं हुआ तो बच्चों को इतनी गंभीर चोट कैसे लगी?19 सितंबर की घटना के 20 दिन बाद भी सवाल कायम—रसोई में बच्चे कर क्या रहे थे?

मदनपुर -:-मदनपुर के प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास में 19 सितंबर को खाना बनाते समय दो नाबालिग बच्चों के घायल होने की घटना अब छात्रावास की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। बताया जा रहा है कि कक्षा 9वीं में पढ़ने वाले ओमकार ध्रुव निवासी कोदोहरदी और मुरली निषाद निवासी सतधार घटना में घायल हुए थे। दोनों को उपचार के लिए जिला अस्पताल गरियाबंद ले जाया गया था।

घटना को लेकर जहां बच्चों के परिजन और स्थानीय लोग कई सवाल उठा रहे हैं, वहीं छात्रावास प्रबंधन की ओर से लोकेश्वर पटेल ने घटना को लेकर अलग पक्ष रखा है।

प्रबंधन का कहना—कुकर ब्लास्ट नहीं हुआ

ए.सी.परियोजना लोकेश्वर पटेल के मुताबिक छात्रावास में कुकर ब्लास्ट जैसी कोई घटना नहीं हुई थी। उनका कहना है कि बच्चों पर गर्म पानी आदि चिपकने के कारण वे घायल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि घटना की जानकारी तत्काल बच्चों के परिजनों को दे दी गई थी और बच्चों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया।

विभाग के इस बयान के बाद सवाल और भी दिलचस्प हो गया है—अगर कुकर ब्लास्ट नहीं हुआ, तो आखिर बच्चों को इतनी चोट कैसे लगी? और अगर रसोइया उस दिन मौजूद था, तो नाबालिग बच्चे रसोई में क्या कर रहे थे?

रसोइया था तो बच्चों की रसोई में एंट्री क्यों?

परिजनों और स्थानीय लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रावास में भोजन बनाने के लिए रसोइया मौजूद था तो फिर नाबालिग बच्चे खाना बनाने के काम में कैसे पहुंचे?

क्या बच्चे सिर्फ रसोई में मौजूद थे?
क्या वे खाना बनाने में मदद कर रहे थे?
क्या गैस चूल्हे और प्रेशर कुकर के पास उनकी मौजूदगी सामान्य थी?
या उस दिन कोई ऐसी परिस्थिति बनी, जिसके कारण बच्चे रसोई तक पहुंचे?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है।

कुकर ब्लास्ट नहीं तो ‘इंजरी’ का कारण क्या?

अगर कुकर फटा ही नहीं, तो फिर बच्चों के हाथ, सिर या शरीर पर लगी चोटों का कारण आखिर क्या था? और अगर गर्म पानी के कारण बच्चे घायल हुए, तो गर्म पानी बच्चों तक पहुंचा कैसे?

मतलब कुकर निर्दोष है, रसोइया भी मौजूद था और बच्चों को तत्काल अस्पताल भी पहुंचा दिया गया—फिर सवाल बस इतना बचता है कि बच्चे रसोई में पहुंचे कैसे और वहां उनके साथ हुआ क्या?

परिजनों का कहना—अस्पताल पहुंचने के बाद पता चला

परिजनों की ओर से घटना की जानकारी मिलने और बच्चों को देखने के बाद उनकी चिंता बढ़ने की बात कही जा रही है। इतना ज्यादा इंजरी था कि हम लोग देख भी नहीं पाए। उपचार के बाद करीब चार-पांच दिन में परिजन दोनों बच्चों को अपने साथ घर ले गए। परिवार के अनुसार बच्चों का इलाज अभी भी चल रहा है।

वहीं प्रबंधन का कहना है कि घटना के तुरंत बाद ही परिजनों को सूचना दे दी गई थी और बच्चों को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया था। अधिकारी को घटना के बारे में तत्काल जानकारी दे दिया गया था ।

यानी घटना के बाद सूचना देने में देरी हुई या नहीं, यह भी जांच में स्पष्ट किया जाना चाहिए।

20 दिन बाद भी असली सवाल वहीं

19 सितंबर की घटना को करीब 20 दिन बीत चुके हैं। इसके बावजूद कुछ बुनियादी सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं—

बच्चे रसोई में क्यों थे?
क्या वे खाना बनाने में लगे थे?
घटना के समय रसोइया वास्तव में मौजूद था या नहीं?
बच्चे गर्म पानी से घायल हुए तो वह स्थिति बनी कैसे?
रसोई और गैस उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कब हुई?
घटना की विभागीय रिपोर्ट में क्या दर्ज किया गया?

इन सवालों का जवाब सामने आने पर ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

छात्रावास पढ़ाई के लिए है या रसोई प्रशिक्षण के लिए?

सरकार बच्चों को दूर-दराज के गांवों से लाकर छात्रावास में पढ़ाई, भोजन और सुरक्षित माहौल देने की व्यवस्था करती है। ऐसे में यदि बच्चे रसोई में जाकर खाना बनाने या गर्म पानी जैसी परिस्थितियों का सामना करते हैं और घायल हो जाते हैं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

और अगर प्रबंधन के मुताबिक न कुकर ब्लास्ट हुआ, न रसोइया गायब था, तो फिर सवाल और सीधा है—

बच्चे उस दिन रसोई में कर क्या रहे थे?

बच्चों के हाथ में किताब-कॉपी होनी चाहिए, कुकर का हैंडल नहीं।

अब जरूरत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि 19 सितंबर को छात्रावास की रसोई में आखिर हुआ क्या था और दो नाबालिग बच्चे घायल कैसे हुए।

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

इन्हे भी जरूर देखे

Must Read