छत्तीसगढ़ टेनिस एसोसिएशन के महासचिव गुरुचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की दी बधाई, बोले-प्रकृति,परंपरा और किसान के सम्मान का पर्व है

छत्तीसगढ़ टेनिस एसोसिएशन के महासचिव गुरुचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों को हरेली तिहार की दी बधाई, बोले-प्रकृति,परंपरा और किसान के सम्मान का पर्व है

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✍️ लोकहित 24 न्यूज़ संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद छत्तीसगढ़ 

रायपुर _ छत्तीसगढ़ टेनिस एसोसिएशन के महासचिव गुरुचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ के पारंपरिक और प्रमुख पर्व हरेली तिहार की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि हरेली केवल हरियाली का पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, कृषि परंपरा, लोकजीवन और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव का प्रतीक है।

होरा ने कहा कि सावन की पहली अमावस्या के साथ मनाया जाने वाला हरेली तिहार छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति में सदियों से रचा-बसा है। यह वह समय होता है जब किसान खेतों में बुआई का काम पूरा कर अच्छी बारिश और बेहतर फसल की कामना करता है। ऐसे में हरेली पर्व किसान के परिश्रम और धरती के प्रति उसकी आस्था को सम्मान देने का अवसर भी है।

हरेली के दिन किसान हल, गैंती, कुदाल सहित कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और लोकजीवन में खेती तथा कृषि उपकरणों का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। ग्रामीण अंचलों में इस अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

हरियाली के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश

गुरुचरण सिंह होरा ने कहा कि बदलते दौर में हरेली तिहार का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह पर्व हमें प्रकृति के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियान हरियाली और प्रकृति संरक्षण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन रहे हैं।l

“हरेली केवल हरियाली का पर्व नहीं, बल्कि हमारी मिट्टी, किसान और प्रकृति के प्रति सम्मान का उत्सव है। इस हरेली पर आइए ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें। हरियाली बढ़े, किसान खुशहाल हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति व परंपरा सदैव समृद्ध होती रहे।

गेड़ी, पारंपरिक खेल और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की रौनक

हरेली तिहार पर गांव-गांव में पारंपरिक खेलों और लोक संस्कृति की रौनक देखने को मिलती है। गेड़ी चढ़ना, खो-खो और कबड्डी जैसे खेल पर्व के उत्साह को बढ़ाते हैं। वहीं घरों में चीला, खुरमी, फरहा, बबरा और ठेठरी जैसे पारंपरिक पकवान तैयार किए जाते हैं।

हरेली की यही विशेषता है कि यह केवल पूजा और परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने वाला उत्सव भी है।

सामाजिक एकता और छत्तीसगढ़ी अस्मिता का पर्व

हरेली जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को एक साथ जोड़ता है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की सामाजिक समरसता, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है।

गुरुचरण सिंह होरा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि हरेली तिहार को उत्साह के साथ मनाने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण, वृक्षारोपण और अपनी लोकपरंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प भी लें।

“हरेली छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा पर्व है, जो हमें अपनी मिट्टी, किसान, प्रकृति और परंपराओं से जोड़ता है। यह पर्व प्रदेश में सुख-समृद्धि, हरियाली और भाईचारे का संदेश लेकर आए।”

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